D.El.Ed. (B.T.C.)

qq

D.El.Ed. (B.T.C.)

 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महेन्द्र पी.जी. कॉलेज, हलधरपुर, मऊ का डी.एल.एड. (बी.टी.सी.) पाठ्यक्रम प्राथमिक स्तर के योग्य, संवेदनशील एवं दक्ष शिक्षकों के निर्माण के उद्देश्य से संचालित किया जाता है। यह दो वर्षीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को शिक्षा के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों पक्षों का समुचित ज्ञान प्रदान करता है। महाविद्यालय में इस पाठ्यक्रम का अनुमोदित प्रवेश क्षमता 50 सीटों की है तथा यह एनसीटीई के मानकों के अनुरूप संचालित किया जाता है।

डी.एल.एड. पाठ्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में ऐसी शिक्षण क्षमता विकसित करना है, जिससे वे प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चों को प्रभावी, रोचक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकें। यह कार्यक्रम शिक्षण कौशल के साथ-साथ नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी विकसित करता है।

महाविद्यालय में अनुभवी एवं योग्य शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को बाल मनोविज्ञान, शिक्षण विधियों, पाठ योजना निर्माण, मूल्यांकन प्रणाली तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे प्रशिक्षुओं का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।

पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें विद्यालय आधारित प्रशिक्षण, शिक्षण अभ्यास तथा वास्तविक कक्षा परिस्थितियों का अनुभव भी कराया जाता है। इससे वे भविष्य में आत्मविश्वास के साथ शिक्षण कार्य करने में सक्षम बनते हैं।
 

महाविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण अनुशासन, गुणवत्ता और नवाचार पर आधारित है। विद्यार्थियों को नियमित व्याख्यान, समूह चर्चा, सेमिनार, कार्यशालाओं तथा शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय अधिगम के अवसर प्रदान किए जाते हैं।

डी.एल.एड. कार्यक्रम में बाल-केंद्रित शिक्षा, समावेशी शिक्षा, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, जीवन कौशल तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया जाता है। इससे प्रशिक्षु आधुनिक शिक्षा प्रणाली की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार होते हैं।

महाविद्यालय का पुस्तकालय विद्यार्थियों के अध्ययन एवं शोध कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभिन्न विषयों की पुस्तकों, संदर्भ सामग्री तथा शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता विद्यार्थियों को गहन अध्ययन के लिए प्रेरित करती है।

प्रयोगात्मक गतिविधियों, मॉडल निर्माण, शिक्षण सामग्री तैयार करने तथा कक्षा प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं प्रस्तुतीकरण कौशल का विकास किया जाता है। इससे वे शिक्षण को अधिक प्रभावी एवं आकर्षक बनाने की कला सीखते हैं।

महाविद्यालय विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, सहयोग की भावना तथा सकारात्मक व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष ध्यान देता है। विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों में सहभागिता के माध्यम से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास निरंतर बढ़ता है।

डी.एल.एड. पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में नवीन शोध, राष्ट्रीय शिक्षा नीतियों तथा बदलती शिक्षण पद्धतियों से भी परिचित कराता है। इससे वे समयानुकूल एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए तैयार होते हैं।